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प्रकृतिवाद एवम् प्रयोजनवाद

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प्रकृतिवाद एवम् प्रयोजनवाद

  1. 1. जिला जिक्षा एवम् प्रजिक्षण संस्थान सुल्तानपुर डी एल एड 2021 बैच प्रोिेक्ट ररपोर्ट ( प्रक ृ जिवाद एवम् प्रयोिनवाद ) जवषय : विटमान भारिीय समाि और प्रारंजभक जिक्षा
  2. 2. प्रक ृ जिवाद जिक्षा • प्रक ृ तिवाद (NATURALISM) :- NATURAL + ISM • NATURAL का अर्थ प्रक ृ ति से संबंतिि और ISM का अर्थ तसद्ांि , प्रणाली, वाद है। • इस प्रकार प्रक ृ ति से संबंतिि तसद्ांिो का अध्यन ही प्रक ृ तिवाद है । • प्रक ृ तिवाद तिक्षा क े क्षेत्र में प्रक ृ ति िब्द का प्रयोग दो अर्ों में करिे हैं (1) भौतिक प्रक ृ ति और (2) बालक की प्रक ृ ति । • भौतिक प्रक ृ ति - बाहरी प्रक ृ ति • बालक की प्रक ृ ति - मूल प्रवृतियां, आवेग, क्षमिाएं प्रक ृ जिवादी दािटजनक जवचारधारा िेम्स वाडट क े अनुसार- प्रक ृ तिवाद वह तसद्ांि है जो प्रक ृ ति को ईश्वर से पृर्क करिा है। आत्मा को पदार्थ क े अिीन करिा है और अपररविथनीय तनयमों को सवोच्चिा प्रदान करिा है।
  3. 3. जिक्षा का अथट प्रक ृ तिवादी दिथन क े अनुसार तिक्षा का सािन है जो मनुष्य को उसकी प्रक ृ ति क े अनुरूप तवकास करने, जीवन व्यिीि करने योग्य बनािी है। प्रक ृ तिवादी तिक्षा को स्वाभातवक तवकास की प्रतिया मानिे हैं। प्रक ृ जिवादी जिक्षा दािटजनक – बेकन, कमेतनस, स्पेन्सर, रूसो आतद हैं। रूसो क े अनुसार “सच्ची तिक्षा वह है, जो व्यक्ति क े अंदर से प्रस्फ ु तिि होिी है। यह इसकी अंितनथतहि िक्तियों की अतभव्यक्ति है। प्रक ृ जिवाद िथा पाठ्यक्रम प्रक ृ तिवाद तवद्यार्ी को पाठ्यिम का आिार मानिे है। उनका कहना है तक पाठ्यिम की रूपरेखा तवद्यार्ी की 1. रुतियो 2. योग्यिाओं/ क्षमिाओं 3. मूल प्रवृतियों 4. स्वाभातवक तियाओं 5. व्यक्तिक तभन्निाओ को ध्यान में रखकर िैयार होनी िातहए।
  4. 4. प्रक ृ जिवाद व जिक्षा क े उद्देश्य :- स्पेंसर क े अनुसार जीवन का उद्देश्य इस जगि में सुखपूवथक रहना है तजसे उसने समग्र िीवन कहा है। समग्र जीवन का तवश्लेषण वह जीवन की 5 प्रमुख तियाओं क े माध्यम से करिा है जो स्पेंसर क े अनुसार तनम्नतलक्तखि है 1. आत्मरक्षा 2. जीवन की मौतलक आवश्यकिओ की पूतिथ 3. संितिपालन 4. सामातजक एवं राजनैतिक संबंिों का तनवाथहन 5. अवकाि क े समय का सदुपयोग। प्रक ृ जिवाद में जिक्षण जवजध :-  स्व अतिगम तवति  करक े सीखना/ तिया तवति  खेल तवति  भ्रमण तवति
  5. 5. जिक्षाथी प्रक ृ तिवाद क े अंिगथि पूरी तिक्षा प्रतिया का क ें द्र तबंदु बालक/ तवद्यार्ी होिा है। तिक्षा तिक्षार्ी को प्रक ृ ति क े अनुक ू ल ढालने का सािन होिी है। प्रक ृ तिवादी तविारक तवद्यार्ी को ईश्वर की श्रेष्ठ व पतवत्र क ृ ति मानिे हैं तक ं िु सामातजक क ृ ि मिा में फ ं सकर बालक का स्वाभातवक तवकास रूक जािा है। जिक्षक प्रक ृ तिवाद क े अनुसार तिक्षक तनरीक्षणकिाथ, पर्प्रदिथक, बाल प्रक ृ तिज्ञािा, भ्रमणकिाथ, तमिवाकी िर्ा प्रायोतगक ज्ञान से तभज्ञ होिा है। वह छात्रों पर तकसी बाि, तकसी ित्व को जबरन नहीं र्ोपिा बक्ति वह अपने छात्रों को स्विः तवकास करने हेिु प्रेररि करिा है। प्रक ृ तिवाद तविारक प्रक ृ ति को ही वास्ततवक तिक्षक मानिे हैं।
  6. 6. अनुिासन प्रक ृ तिवादी दमनात्मक अनुिासन का तवरोि करिा है िर्ा मुक्त्यात्मक अनुिासन की बाि करिा है । प्रक ृ तिवादी तविारको का मानना है तक गलि कायों क े तलए प्रक ृ ति स्वयं दंतिि करेगी िर्ा अच्छे कायथ क े तलए पुरस्क ृ ि। जवद्यालय तवद्यालय क े स्वरूप और व्यवस्र्ा क े संबंि में प्प्प्रक ृ तिवातदयो का कहना है तक तवद्यालय को प्रक ृ ति क े अनुक ू ल होना िातहए वास्ततवक तवद्यालय िो स्वयं प्रक ृ ति ही है तफर भी यतद औपिाररक तिक्षा देने वाले सामातजक तवद्यालय की कल्पना की जाए िो वह क ृ तत्रमिा और औपिाररकिाओं से तवहीन होना िातहए। कक्षा, वगथ, समय- सारणी, परीक्षा आतद का बंिन नहीं होना िातहए।
  7. 7. उिादेयिा/ प्रासंतगिा 1. इस तविारिारा क े अनुसार तिक्षा को बाल क ें तद्रि दृतिकोण से पूररि तकया 2. इस तविारिारा क े कारण ही आज तिक्षा में बालकों क े स्विंत्र तिंिन अनुभव िीलिा तियािीलिा एवम् खेल तवति का मागथ प्रिास्त हुआ। 3. ज्ञानेंतद्रय प्रतिक्षण प्रतिक्षण को प्रमुखिा देने का श्रेय प्रक ृ तिवाद को है 4. प्रक ृ तिवाद ने तिक्षा में िब्दों क े स्र्ान पर अनुभव को महत्वपूणथ बिाया।
  8. 8. प्रयोिनवाद और जिक्षा प्रयोजनवाद से आिय यह है तक सभी तविारों, मूल्ों एवं तनणथयों का सत्य व्यवहाररक पररणामों से ही पाया जािा है। यतद इनक े पररणाम संिोषजनक सत्य हैं िो वे हैं, अन्यर्ा नहीं। प्रयोजनवाद में प्रयोजनवाद दिथन की वह िाखा है जो तकसी पूवथ तसद् सत्य को स्वीकार नहीं करिी है। इसक े अनुसार सत्य का मूल व्यवहाररक है क्ोंतक मानवीय आवश्यकिाओं की पूतिथ िर्ा मानवीय समस्याओं क े समािान में सत्य की अविारणा तनतहि होिी है। जॉन तिवी इस दिथन क े महान प्रजिपादक हैं जॉन तिवी क े अनुसार “ज्ञान िर्ा मक्तस्तष्क स्वयं में साध्य नहीं है अतपिु सािन है। इन्ोंने मानवीय समस्याओं क े हल क े तलए वैज्ञातनक तवति को उपयुि माना है।” नामकरण जॉन तिवी - सािनवाद, करणवाद, प्रयोगवाद तकलपैति ि क - प्रयोजनवाद
  9. 9. जिक्षा का अथट तिक्षा क े क्षेत्र में प्रयोजनवाद परंपरागि और अनुदार ज्ञान क े तवरुद् िांति है। इसने तिक्षा की संकल्पना को कई रूपों में प्रस्तुि तकया है जो तनम्नतलक्तखि है-  तिक्षा अनुभव का पुनतनथमाथण करने वाली प्रतिया है।  तिक्षा स्वयं जीवन है।  तिक्षा सामातजक जीवन का आिार है िर्ा सामातजक क ु िलिा प्राप्त करने की प्रतिया है।  तिक्षा एक लोकिंत्रीय की प्रतिया है।
  10. 10. जिक्षा क े उद्देश्य प्रयोजनवाद पररविथन में तवश्वास व्यि करिा है िर्ा अनुभव व उपयोतगिा क े आिार पर आदिों, सत्य व मूल्ों में आत्मसािीकरण पर बल देिा है। प्रयोजनवाद क े अनुसार तिक्षा क े तनम्नतलक्तखि उद्देश्य होने िातहए- 1. नवीन आदिों, मूल्ों का सृजन करना। 2. सामातजक कायथ - क ु िलिा का तवकास करना। 3. वािावरण क े सार् समायोजन की क्षमिा का तवकास करना। 4. अनुभव का पुनतनथमाथण करना। 5. सत्यान्वेषण की योग्यिा तवकतसि करना। 6. अलौतकक आनंद की प्राक्तप्त करना। जिक्षा का पाठ्यक्रम प्रयोजनवाद तकसी पूवथ तनतिि पाठ्यिम को स्वीक ृ ि न देिे हुए प्रयोजनवादी तविारक- अनुभवक ें तद्रि पाठ्यिम पर बल देिे हैं। उन्ोंने पाठ्यिम की रूपरेखा प्रस्तुि ना करक े पाठ्यिम तनमाथण संबंतिि तसद्ांिों पर अपने तविार व्यि तकए हैं जो बहुि ही उपयोगी िर्ा मूल्वान हैं पाठ्यिम तनमाथण संबंतिि तसद्ांि- 1. उपयोतगिा का तसद्ांि 2. रुति का तसद्ांि 3. अनुभव क ें तद्रि तसद्ांि 4. तिया क ें तद्रि तसद्ांि 5. एकीकरण का तसद्ांि 6. तवतवििा का तसद्ांि
  11. 11. जिक्षण जवजध तिक्षण तसद्ांिों िर्ा तिक्षण तवतियों क े क्षेत्र में प्रयोजनवाद की महत्वपूणथ तदन है प्रयोजनवाद तकसी रूत़िवादी परंपरागि तनक्तिय तिक्षण पद्ति का समर्थन नहीं करिा अतपिु नवीनिम मनोवैज्ञातनक तिक्षण तवतियों क े सृजन एवं उपयोग को महत्व देिा है  सीखने की उद्देश्य पूणथ प्रतिया का तसद्ांि  तिया या अनुभव द्वारा सीखने का तसद्ांि  एकीकरण का तसद्ांि  बाल क ें तद्रि तसद्ांि  सामूतहक तिया का तसद्ांि प्रयोजनवाद की एक महत्वपूणथ तिक्षण तवति प्रोिेक्ट/ योिना जवजध है इसे समस्या समाधान जवजध भी कहिे हैं।
  12. 12. जिक्षक :- प्रयोजनवाद तिक्षक को नवीन आदिथ अमूल् िक्तियों का तनमाथण करने वाला आदिन ज्ञान तवज्ञान से यज्ञ अनुभव िील तियािील और पररसर में होने पर बल देिा है प्रयोजनवाद का मानना है तक तिक्षक को सदैव प्रयोग करिे रहना िातहए और उसी क े अनुरूप अपने तिक्षण तवति व पाठ्यिम में सुिार करिे रहना िातहए। जिक्षाथी :- प्रयोजनवाद तिक्षार्ी को नए मूल्ों का तनमाथणकिाथ, तिया करने वाला, दू रदिी सृजनात्मकिा एवं प्रयोगवादी होने पर बल देिा है। इस तविारिारा में भी तवद्यार्ी को क ें द्रीय स्र्ान तदया गया है। प्रयोजनवाद में तवद्यार्ी की प्रक ृ ति सामाजिक प्राणी मानिे हैं प्रयोजनवाद में छात्रों को कक्षा में तनक्तिय होकर नहीं बैठना िातहए बक्ति सतिय रूप से ज्ञान प्राक्तप्त क े तलए सजग रहना िातहए।
  13. 13. जवद्यालय :- प्रयोजनवादी तिक्षा को सामातजक प्रतिया मानिे हैं। उनका स्पि मि है तक तिक्षा ही समाज को नया रूप देिी है। अिः ये तिक्षा संस्र्ा को सामातजक संस्र्ा मानिे हैं। 1. तवद्यालय समाज का लघु रूप है। 2. तवद्यालय समाज का सच्चा प्रतितनति है। 3. तवद्यालय समाज की प्रयोगिाला है। 4. तवद्यालय समुदाय का क ें द्र है। 5. तवद्यालय कायथिील नागररकों क े जीवन का स्र्ल है। अनुिासन :- प्रयोजनवादी तविारक बाहरी अनुिासन, तिक्षक क े श्रेष्ठ अतिकार और िारीररक दंि की तनंदा करिे हैं। वह कठोर दमनात्मक अनुिासन व प्रभावात्मक अनुिासन की अविारणा को स्वीकार नहीं करिे हैं। इन सबसे वे हिकर सामाजिक अनुिासन का समर्थन करिे हैं जो सामाजिक समझदारी पर आिाररि होना िातहए।
  14. 14. उपादेयिा :- आिुतनक तिक्षा क े स्वरूप तनिाथरण में प्रयोजनवाद की महत्वपूणथ भूतमका और योगदान है जो तनम्नतलक्तखि हैं- 1. कक्षा गि पररक्तस्र्तियों में छात्रों की सतिय भागीदारी पर बल देना। 2. करक े सीखना (तिया तवति) को महत्वपूणथ तवति क े रूप में अपनाने पर बल देना। 3. व्यवसातयक तिक्षा और तवज्ञान तिक्षा को प्रोत्सातहि करना। 4. योजना तवति का तिक्षा में अनुप्रयोग। 5. समाजोपयोगी तिक्षा की अविारणा का तवकास।
  15. 15. धन्यवाद मार्टदिटन मे :- जप्रयंका मैंम (प्रवक्ता) जिला जिक्षा एवम् प्रजिक्षण संस्थान जववेकनर्र सुल्तानपुर उत्तर प्रदेि प्रस्तुिकिाट :- छोर्ू (प्रजिक्षु) डी एल एड (2021) सेमेस्टर – जििीय सेक्शन - डी रोल नंबर - 47 पंिीकरण संख्या - 2186049205

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