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Shri Guru Nanak Dev Ji - Sakhi 045

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http://spiritualworld.co.in सच्चे वैरागी बनने का उपदेश: श्री गुरु नानक देव जी ने उत्तर दिशा की यात्रा समाप्त कर दी| कुछ समय करतारपुर की संगतों का कल्याण करते रहें| करतारपुर से आप तलवंडी पहुंच गए| वहां पहुंचकर वेशाखी सम्वत १५७६ का मेला कटास राज जिला जेहलम में जाकर किया| वहां बहुत से सन्यासी एकत्रित थे| गुरु जी ने उनको समझाया कि जो लोग गृहस्थ के दुखों से डरकर भाग जाते हैं|
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Shri Guru Nanak Dev Ji - Sakhi 045

  1. 1. श्री गुर नानक देव जी ने उत्तर िदशा की यात्रा समाप कर दी| कुछ समय करतारपुर की संगतो का कल्याण करते रहे| करतारपुर से आप तलवंडी पहुंच गए| वहां पहुंचकर वेशाखी सम्वत १५७६ का मेला कटास राज िजला जेहलम मे जाकर िकया| वहां बहुत से सन्यासी एकित्रत थे| गुर जी ने उनको समझाया िक जो लोग गृहस्थ के दुखो से डरकर भाग जाते है| अपना घर-पिरवार छोड़ देते है व वैराग्य धारण कर लेते है वे मंद वैरागी होते है| िजसका फल भी कम होता है| 1 of 2 Contd…
  2. 2. परन्तु दूसरी ओर जो लोग परमात्मा की याद मे अपनी िलव जोड़े रखते है, घर के सभी सुखो को त्याग कर उपराम हो जाते है वे सच्चे वैरागी होती है| संन्यासी को सच्चा वैराग्य ही धारण करना चािहए| For more Spiritual Content Kindly visit: http://spiritualworld.co.in 2 of 2 End

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